Vinay Narayane

Vinay Narayane

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February 2025

दफ्तर से घर

देर चले हैं घर से दफ़्तर से घरढेर पड़े हैं ख्वाहिशों के बीच डगरसौदा घाटे का कर बैठे हो सिक्कों काशिकायत कर रहा सुकून हर पहर